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लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय | Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय (Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi)

लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के एक ऐसे राजनेता थे जोकि देश के द्वतीय प्रधानमंत्री बने. उन्होंने नेहरु जी की मृत्यु हो जाने के बाद इस पद के लिए शपथ ली थी. इन्होने ने ही सन 1965 में मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए भारत – पाकिस्तान युद्ध के वक़्त प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान जय किसान’ दिया था, जोकि काफी लोकप्रिय रहा. महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरु जैसे प्रमुख भारतीय राष्ट्रीय नेताओं से प्रभावित होकर वे सन 1920 के दशक की शुरुआत में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए. उनके द्वारा किये गये कार्य के लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ पुरस्कार दिया गया था, और यह पुरस्कार उन्हें उनकी मृत्यु के पश्चात दिया गया था.

Lal Bahadur Shastri

शास्त्री जी का जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र. म.

(s.No.)

परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name लाल बहादुर शास्त्री
2. जन्मतिथि (Birth Date) 2 अक्टूबर, 1904
3. जन्म स्थान (Birth Place) मुगलसराय, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
4. मृत्यु (Death) 11 जनवरी, 1966
5. मृत्यु स्थान (Death Place) ताशकेंट सोवियत संघ
6. उम्र (Age) 61 साल
7. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
8. पेशा (Profession) राजनेता
9. राशि (Zodiac Sign) तुला
10. प्रसिद्धि (Famous As) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में
11. राजनीतिक विचारधारा (Political Ideology) समाजवादी, राष्ट्रवादी और लिबरल
12. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
13. धर्म (Religion) हिन्दू
14. जाति (Caste) कायस्थ
15. आंदोलन (Movement) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
16. शिक्षा (Education)  वाराणसी

शास्त्री जी के परिवार की जानकारी (Family Details)

1. पिता का नाम (Father’s Name शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
2. माता का नाम (Mother’s Name) रामदुलारी देवी
3. बहनों के नाम (Sister’s Name) कैलाशी देवी (बड़ी बहन)

सुंदरी देवी (छोटी बहन)

4. नाना जी का नाम (Maternal Grandfather’s Name) श्री मुंशी हजारी लाल
5. मामा का नाम (Maternal Uncle’s Name) बिंदेश्वरी प्रसाद
6. पत्नी का नाम (Spouse Name) ललिता देवी
7. बेटों के नाम (Son’s Name) हरी कृष्ण, अनिल, सुनील, अशोक
8. बेटियों के नाम (Doughter Name) कुसुम, सुमन
9. नाती का नाम (Grandson’s Name) आदर्श शास्त्री (आम आदमी पार्टी के नेता)

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म एक कायस्थ परिवार में हुआ जोकि काफी निर्धन था, उनका परिवार उत्तरप्रदेश के रामनगर के पास स्थित मुगलसराय का रहने वाला था. इनके पूर्वज रामनगर के जमीनदार की सेवा में थे. इनके पिता का पेशा एक विद्यालय में शिक्षक का था किन्तु बाद में वे एक सरकारी कार्यालय में क्लर्क बने. उनकी माता मुगलसराय के रेलवे स्कूल में हेडमास्टर और अंग्रेजी शिक्षक मुंशी हजारी लाल जी की बेटी थी.

शास्त्री जी का निजी जीवन (Marriage and Personal Details)

शास्त्री जी का विवाह सन 1927 में गणेश प्रसाद जी की सबसे छोटी बेटी ललिता देवी जी के साथ हुआ. वे उस समय देश में चल रही दहेज प्रथा के शख्त खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था. हालाँकि उनके ससुर जी के बार – बार आग्रह करने पर वे दहेज के रूप में केवल खादी के 5 जोड़ी कपड़ों को स्वीकार करने के लिए सहमत हुए. इनके कुल 6 बच्चे हुए.  

शास्त्री जी का शुरूआती जीवन (Early Life)

ये अपने माता – पिता की दूसरी संतान थे, उनकी पहली संतान इनकी बड़ी बहन थी. जब ये 2 साल के भी नहीं हुए थे, तब उनके पिता डिप्टी तहसीलदार के पद पर थे और उस दौरान ब्लूबोनिक प्लेग की बीमारी फैलने की वजह से उनका निधन हो गया था. उस समय उनकी माता अपनी तीसरी संतान को जन्म देने वाली थी. उसके बाद उन्होंने एक लड़की को जन्म दिया और अपने पति की मृत्यु के बाद वे अपने तीनों बच्चों को लेकर अपने पिता के घर चली गई. इसलिए इनका शुरुआती जीवन इनके ननिहाल में बीता.

शास्त्री जी की शिक्षा एवं करियर (Education and Career)

20 वीं शताब्दी में उर्दू एवं संस्कृत भाषा में शिक्षा प्राप्त करने की परंपरा थी. ऐसा इसलिए था क्योकि भारत में अंग्रेजों के आने से पहले उर्दू / फारसी राजाओं की सरकारें थी, और यह परंपरा तभी से चली आ रही थी. इसके चलते शास्त्री जी ने 4 साल की उम्र से मुगलसराय के पूर्व केन्द्रीय रेलवे इंटर कॉलेज से अपनी पढाई शुरू की. 6 साल की उम्र तक उन्होने वहां अध्ययन किया, इसके बाद वे मिर्जापुर के हरीश चन्द्र हाई स्कूल में 7 वीं कक्षा में शामिल हुए. अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के कुछ साल बाद वे और उनका परिवार वापस वाराणसी आ गया. इनके अंदर बचपन से ही साहस, धैर्य, आत्मनियंत्रण एवं निस्वार्थ जैसे गुण थे. उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई काशी विद्यापीठ से पूरी की. अपनी स्नातक की पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना उपनाम शास्त्री रख लिया, जिसका मतलब विद्वान या पवित्र शास्त्र होता है. इसके तुरंत बाद वे उस समय के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित पीपुल्स सोसाइटी की सेवा में शामिल हो गए.

शास्त्री जी गाँधी जी के शिष्य के रूप में (Lal Bahadur Shastri As A Gandhi’s Disciple)

जैसे – जैसे वे बड़े हुए, अंग्रेजों से स्वतंत्रता के लिए देश में हो रहे संघर्ष में दिलचस्पी लेने लगे. उस समय जब वे अपनी 10 वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने महात्मा गाँधी जी एवं पंडित मदनमोहन मालवीय द्वारा आयोजित एक बैठक में भाग लिया. वे उनसे इतने प्रभावित हुए थे, कि उन्होंने महात्मा गाँधी जी से असहयोग आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई थी. इसके लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ने का भी फैसला ले लिया था, लेकिन उनके इस निर्णय से उनकी माँ बहुत दुखी थी. परिवार वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपना मन बना लिया था, और वे अपने इरादों में दृढ़ थे. वे कांग्रेस पार्टी की लोकल ब्रांच में वोलेंटियर  के रूप में शामिल हुए. ये ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध चल रहे कई आंदोलनों से जुड़े, जोकि उनके जेल जाने का कारण बना. लेकिन वे उस समय बहुत छोटे थे इसलिए उन्हें सजा से मुक्ति मिल गई थी. बाद में उन्होंने काशी विद्यापीठ से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर वे धीरे – धीरे राजनीति की ओर चल दिए.

शास्त्री जी का राजनीतिक करियर (Political Career) 

आजादी से पहले (Before Independence)

सन 1928 में गाँधी जी ने यह ऐलान किया कि शास्त्री जी कांग्रेस पार्टी के एक सक्रिय एवं मैच्यूर व्यक्ति है. उन्होंने सन 1930 में हुए ‘नमक सत्याग्रह’ में भी हिस्सा लिया था, जिसके चलते उन्हें ढाई साल जेल में रहने पड़ा. जेल से छूटने के कुछ साल बाद सन 1937 में उन्होंने संसदीय बोर्ड के ऑर्गनाईजिंग सेक्रेटरी के रूप में कार्य किया. इसके बाद सन 1940 में उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थन में व्यक्तिगत आंदोलन करने के लिए 1 साल के लिए फिर से जेल जाना पड़ा था. 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, इसमें भी उन्होंने सिरकत की, किन्तु इसके चलते जवाहरलाल नेहरु जी के घर से स्वतंत्रता सेनानियों को निर्देश देने के लिए उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा. उन्हें इस बार 4 साल तक जेल में रहने पड़ा, सन 1946 में उन्हें जेल से रिहा किया गया था.

आजादी के बाद (After Independence)

सन 1947 में इनकी उत्तरप्रदेश राज्य जहाँ उनका जन्म हुआ था में संसद के एक सचिव के रूप में नियुक्ति की गई. इसके बाद वे मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त की कैबिनेट में पुलिस एवं परिवहन मंत्री बने. उन्होंने कड़ी मेहनत, दक्षता और क्षमता के साथ उत्तरप्रदेश के लिए कार्य किया, जिससे जवाहरलाल नेहरु जी भी काफी प्रभावित हुए. उन्होंने शास्त्री जी को दिल्ली बुला लिया और सन 1951 में वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के जनरल सेक्रेटरी बन गये. अगले साल सन 1952 में उन्हें रेल मंत्री के रूप में केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल होने का मौका मिला. शास्त्री जी अपनी नैतिकता के लिए जाने जाते थे, भारतीय रेलवे और परिवहन उनके आधीन था. किन्तु उसी वर्ष तमिलनाडू में एक रेल दुर्घटना हुई, जिसमें 112 लोग मारे गये. इसकी जिम्मेदारी उन्होंने ली और उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया. सन 1957 में वे फिर से कॉमर्स एवं इंडस्ट्री मंत्री के रूप में केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल हुए, और फिर 4 साल बाद यानि सन 1961 में उन्हें गृहमंत्री के पद के लिए चुन लिया गया.

शास्त्री जी प्रधानमंत्री के रूप में (Lal Bahadur Shastri As A Prime Minister)

उस समय के तात्कालिक प्रधानमंत्री पंडित जी की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रमुख के रूप में इन्हें चुना गया. उन्हें कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री के पद के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित किया गया. फिर 9 जून 1964 को इन्होने भारत के दुसरे प्रधानमंत्री बनकर शपथ ग्रहण की. भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें कई ऐसी चुनौतियों से गुजरना पड़ा जिसमें भारत – पाकिस्तान युद्ध भी शामिल था. इस युद्ध के दौरान उन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था और यह बाद में राष्ट्र का नारा बन गया. उनके द्वारा किये गये राष्ट्रवादी शासन की दुनिया भर में प्रशंसा की गई. उन्होंने खाने और दूध के उत्पादन के लिए हरित एवं श्वेत क्रांति को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इनके कार्यकाल के दौरान सन 1965 में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और भारत के खाद्य निगम का गठन किया गया.

चीन के साथ हुए युद्ध के बाद इन्हें अपने राजनीतिक कार्यकाल में एक और बड़े युद्ध का सामना करना पड़ा. वह युद्ध था भारत – पाकिस्तान का युद्ध. किन्तु उन्होंने स्पष्ट रूप से पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा कि – ‘भारत, यह सब चुपचाप बैठ कर नहीं देखेगा’. ऐसा कहकर उन्होंने सुरक्षा बलों को आगे बढ़कर युद्ध करने के लिए प्रोत्साहित किया. इसके बाद सन 1965 में यह युद्ध समाप्त हो गया, यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र द्वारा युद्धविराम की मांग के प्रस्ताव को पारित करने के बाद खत्म हुआ. इसके बाद रूस के पीएम ने ताशकन्द में दोनों देशों के बीच संधि की पेशकश की, और 10 जनवरी 1966 को इन्होने उस समय के पाकिस्तान के पीएम के साथ मिलकर ताशकन्द संधि पर हस्ताक्षर किये. 

शास्त्री जी की मृत्यु (Shastri’s Death)

ताशकन्द में दोनों देशों के बीच हुई ताशकेंट संधि के अगले ही दिन शास्त्री जी की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. उन्हें इसके पहले 2 बार दिल का दौरा पड़ चूका था. हांलाकि लोगों का मानना हैं कि उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई है बल्कि उनकी हत्या की गई है. इस तरह से इनका प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल केवल 2 साल तक ही सक्रिय रहा.

शास्त्री जी की मृत्यु का रहस्य (Mystery of Shastri’s Death)

पाकिस्तान के साथ ताशकेंट संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद इनकी मृत्यु ने कई सवालों को जन्म दिया. उनकी पत्नी ललिता देवी जी ने यह आरोप लगाया कि उन्हें जहर देकर उनकी हत्या की गई है. जिसके चलते उस समय प्रधानमंत्री की सेवा करने वाले रुसी बटलर को गिरफ्तार कर लिया गया था. किन्तु डॉ द्वारा यह प्रमाणित करने के बाद कि उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से ही हुई हैं, रुसी बटलर को छोड़ दिया गया. इस बात में कितनी सच्चाई है, इसका रहस्य अब तक बना हुआ है.      

शास्त्री जी की याद में धरोहर (Memorial of Lal Bahadur Shastri)

  • शास्त्री जी को सम्मानित करने के लिए उनकी याद में दिल्ली में एक स्मारक बनाया गया है, इसका नाम ‘विजय घाट’ रखा गया है.
  • उनके नाम पर उत्तराखंड के मसूरी में ‘लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ नामक शैक्षणिक संस्थान भी बनाया गया है.
  • शास्त्री जी के नाम पर शुरू किये गये एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा सन 1995 में इनके नाम पर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना की गई, आज के समय में वह भारत के सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों में से एक है.
  • इसके अलावा इनके नाम पर कुछ सड़कों के नाम भी रखे गये हैं, जोकि दिल्ली, मुंबई, पुणे, लखनऊ, वारंगल, पॉण्डीचेरी और इलाहाबाद के शहरों में हैं.
  • वाराणसी में स्थित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम इन्ही के नाम पर ‘लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, वाराणसी’ रखा गया है.

शास्त्री जी के बारें में कुछ रोचक जानकारी (Lal Bahadur Shastri Interesting Facts)

  • जब ये छोटे बच्चे थे तब इन्हें गुरुनानक देव जी की किताबें पढ़ने का बहुत शौक था. वे जाति व्यवस्था के खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने अपना उपनाम श्रीवास्तव छोड़ दिया था.
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और शास्त्री जी का जन्म एक हीतारीख अक्टूबर माह के दुसरे दिन हुआ है.
  • 10 फरवरी सन 1921 को देश के युवाओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए गाँधी जी द्वारा राष्ट्रीय संस्थान के रूप में बनारस में काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया गया. इसमें शास्त्री जी पहले छात्र थे, जिन्होंने यहाँ से अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी.
  • शास्त्री जी ने कुल मिलाकर 9 साल जेल में बिताये और उस दौरान उन्होंने किताबें पढ़ने में अपना समय बिताया, जिससे वे पश्चिमी दार्शनिकों, क्रांतिकारियों और सामाजिक सुधारकों के कार्यों से परिचित हो गये.

शास्त्री जी के सुविचार (Lal Bahadur Shastri Quotes)

  • देश की वफ़ादारी अन्य सभी वफादारी से पहले आती है, और यह एक महत्वपूर्ण वफ़ादारी है, क्योकि हम क्या प्राप्त कर रहे हैं यह उसका वजन नहीं उठा सकती है.
  • जो लोग शासन करते हैं उन्हें यह देखना चाहिए कि लोग प्रशासन के प्रति कैसी प्रतिक्रिया रखते हैं ‘आखिरकार वे लोग ही अंतिम निर्णायक होते है’.
  • हम हमारे साथ – साथ देशभर के लोगों का शांति से विकास करने पर विश्वास करते हैं. हमारा मुख्य उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास और विदेशों के साथ शांति और दोस्ती बनाये रखना है.
  • भ्रष्टाचार को ख़त्म करना बहुत कठिन काम है लेकिन मेरा कहना है कि –“यदि हम इस समस्या से गंभीरता से और दृढ़ संकल्प से निपटें तो हम अपने कर्तव्यों में सफल हो सकते हैं”.
  • यदि पाकिस्तान हमारे क्षेत्र के किसी भी हिस्से को हड़पने का विचार कर रहा है तो उसे इस बारे में फिर से सोचना चाहिए. क्योंकि ‘मैं स्पष्ट रूप से यह बताना चाहता हूँ कि बल के साथ बल मिलेगा और हमारे खिलाफ आक्रामकता को सफल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी’.

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